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भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में तेज़ी, निजी निवेश 618.5 मिलियन डॉलर के पार; 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप सक्रिय

नई दिल्ली। भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार के सुधारों और निजी क्षेत्र के लिए खोले गए अवसरों का असर अब निवेश के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। सरकार के मुताबिक, देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश बढ़कर 618.5 मिलियन डॉलर से अधिक हो गया है, जो पिछले कुछ वर्षों में करीब छह गुना वृद्धि को दर्शाता है।

राज्यसभा में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अब तक निजी संस्थाओं को 100 से अधिक प्राधिकरण (ऑथराइजेशन) जारी किए जा चुके हैं, जबकि 17 स्टार्टअप को अंतरिक्ष गतिविधियों के संचालन की अनुमति दी गई है। सरकार ने इस क्षेत्र के लिए नियामकीय ढांचे को भी मजबूत किया है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और निजी निवेश के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

सरकार के अनुसार, वर्ष 2014 में देश में अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ा केवल एक स्टार्टअप था, लेकिन आज इनकी संख्या बढ़कर 400 से अधिक हो चुकी है। इससे स्पष्ट है कि अंतरिक्ष तकनीक, उपग्रह निर्माण, लॉन्च सेवाओं और स्पेस एप्लिकेशन के क्षेत्र में निजी कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों के बाद निजी कंपनियों के लिए नए अवसर खुले हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ मिलकर निजी कंपनियां अब लॉन्चिंग, सैटेलाइट निर्माण और अन्य अंतरिक्ष परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे भारत की वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।

सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में प्रमुख भागीदार बनाना है। बढ़ता निजी निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम इस दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में रोजगार, नवाचार और निवेश के और अधिक अवसर पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।

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