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गाजर घास उन्मूलन अभियान चलाया गया लोगों को किया जागरूक

हल्द्वानी। गाजर घास करीब 70 साल पहले 1950 में अमेरिकी शंकर गेहूं के साथ इस घास के बीज भी भारत में आए। इसे सबसे पहले पुणे में देखा गया। इसके बाद यह देश के सभी हिस्सों में फैल गई। यह घास विनाशकारी होने के साथ शीघ्र फैलने वाला खरपतवार है। इसके संपर्क में आने से मनुष्यों में डरमेटाइटिस (त्वचा की एलर्जी), दाद, खाज, खुजली एवं दमा (अस्थमा) और हे फीवर जैसी बीमारियां होती हैं।

इसकी रोकथाम के लिए गाजर घास में फूल आने से पूर्व जड़ से उखाड़ देना चाहिए। पर्यावरण और कृषि पर भी इसका कुप्रभाव पड़ता है। यह मिट्टी की उर्वरा शक्ति को कम कर देती है। इसकी जड़ों से पार्थेनियम नाम का जहरीला रसायन निकलता है, जो आसपास दूसरे पौधों को नहीं उगने देता है।

यह संदेश साथी संगठन हल्द्वानी द्वारा वार्ड नंबर 48 में दमुवादूंगा चौराहे से पलक बैंकट हॉल तक लगभग 400 मीटर क्षेत्र में गाजर ग्रास उन्मूलन अभियान के अंतर्गत संगठन के संरक्षक श्री नंदा बल्लभ गुणवंत जी द्वारा नगर क्षेत्र के सभी वरिष्ठ जन, मातृशक्ति तथा नौजवानों को इसके समूल नष्ट करने हेतु दिया गया।

इस अभियान में अन्य संगठनों से सदस्यों की सहभागिता के साथ ही संगठन के महासचिव लक्ष्मण सिंह गोनिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जीवन चंद्र पंतोला, कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र सिंह बोरा, सचिव आनंद सिंह रावत, मोहन सिंह मेहरा, भुवन चंद्र उप्रेती, किशोर कुमार जोशी, के.के. तिवारी, हिमांशु पवार जी के साथ ही वरिष्ठ नागरिक जन कल्याण समिति हल्द्वानी से श्री दया किशन बलुटीया जी ने कार्यक्रम में सहभागिता निभाने के साथ ही स्वस्थ जीवन के लिए इस घास के समूल उन्मूलन का संदेश नगरवासियों को दिया।

कार्यक्रम के अंत में संगठन के अध्यक्ष आनंद सिंह भाकुनी द्वारा सभी वरिष्ठ जन, मातृशक्ति एवं नौजवानों को यह संदेश दिया कि यदि यह गाजर घास उनके घरों के आसपास उगी हुई है तो उसको उखाड़कर समूल नष्ट कर दें, जिससे इससे होने वाले रोगों से स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके। विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों एवं वृद्धजनों को इससे होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। अंत में राष्ट्रीय गान कराकर संगठन के कार्यक्रम का समापन किया गया।

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