नई दिल्ली / अमेरिका (एजेंसी): माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने अमेरिकी सरकार की आर्थिक नीतियों, विशेषकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के टैरिफ प्लान और प्रमुख कंपनियों में इक्विटी हिस्सेदारी लेने के कदमों पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इन नीतियों से बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है और दीर्घकालिक निवेश प्रभावित हो सकता है।
गेट्स ने स्पष्ट कहा कि जब सरकार खुद कंपनियों में हिस्सेदार बन जाती है, तो “खेल के नियम” स्पष्ट और स्थिर होने चाहिए, वरना निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में नीति-निर्माण और कॉरपोरेट प्रतिस्पर्धा के बीच टकराव पैदा हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सरकार हाल के समय में इंटेल और आईबीएम जैसी बड़ी टेक कंपनियों में हिस्सेदारी लेने पर विचार या निवेश कर चुकी है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की कंपनियों में भी सरकारी भागीदारी की संभावनाओं पर चर्चा बढ़ी है। इसी पृष्ठभूमि में बिल गेट्स ने यह बयान दिया है।
गेट्स का मानना है कि सेमीकंडक्टर और हाई-टेक इंडस्ट्री जैसे क्षेत्रों में निवेश लंबे समय का होता है, जो 10 से 20 साल तक चलता है। ऐसे में अगर नीतियां बार-बार बदलती हैं या सरकार किसी कंपनी का पक्ष लेती है, तो यह पूरी इंडस्ट्री के लिए जोखिम पैदा करता है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकार किसी कंपनी की शेयरधारक बन जाती है, तो क्या वह निष्पक्ष रूप से कॉन्ट्रैक्ट और नीतियों का निर्धारण कर पाएगी। उनके अनुसार, इससे तकनीकी नवाचार और प्रतिस्पर्धा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि गेट्स की यह टिप्पणी अमेरिका की औद्योगिक नीति और निजी क्षेत्र में सरकारी हस्तक्षेप को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकती है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सरकार की बढ़ती भागीदारी और टैरिफ नीतियों को लेकर पहले से ही वॉल स्ट्रीट और टेक इंडस्ट्री में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। गेट्स के बयान ने इस बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।





