लखनऊ: कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 12 साल की सरकार को लेकर जोरदार हमला किया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में लोकतंत्र कमजोर हुआ और नागरिकों की आवाज़ दबाई गई। यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनावी मौसम धीरे-धीरे गरमाता जा रहा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि पिछले 12 साल में देश में असहमति और आलोचना को स्वीकार करने की जगह सख्ती और दमन की नीति अपनाई गई। पार्टी ने स्पष्ट किया कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक मामलों में सरकार की नीतियां आम जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी हैं।
पार्टी ने यह भी कहा कि मीडिया और संस्थानों पर दबाव बढ़ाने के चलते स्वतंत्रता और निष्पक्षता प्रभावित हुई है। कांग्रेस का दावा है कि सरकार ने आलोचनात्मक विचारधारा वाले लोगों और विपक्षी दलों को निशाना बनाकर लोकतंत्र की बुनियादी ढाँचे को कमजोर किया है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने ट्वीट और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “देशवासियों को अब यह समझना होगा कि 12 साल की मोदी सरकार ने लोकतंत्र को नहीं बचाया बल्कि उस पर हमला किया। हमारी जिम्मेदारी है कि हम लोकतंत्र की रक्षा करें और जनता को सच से अवगत कराएं।”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस की यह निंदा सीधे आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकती है। पार्टी अपने बयान के जरिए युवाओं और मध्यमवर्गीय मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है।
सामाजिक मीडिया प्लेटफार्म पर कांग्रेस के इस बयान को लेकर प्रतिक्रिया तेज है। कई लोग इसे सही ठहराते हुए मोदी सरकार की आलोचना कर रहे हैं, तो कुछ लोग इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति बता रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में यह स्पष्ट है कि 12 साल के शासन को लेकर राजनीतिक बहस और जनसांख्यिकीय मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। विपक्ष लगातार सरकार की आलोचना कर रहा है, जबकि सरकार अपने विकास के दावों को उजागर करने में लगी हुई है।
कांग्रेस ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर लोकतंत्र और संस्थानों की स्वतंत्रता को बचाया नहीं गया तो आने वाले वर्षों में देश में असंतोष और विभाजन और बढ़ सकता है। पार्टी ने जनता से अपील की है कि वे अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक रहें।





