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कांग्रेस का भाजपा पर सीधा प्रहार: सुप्रिया श्रीनेत ने देहरादून में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को बताया ‘चुनावी छलावा’; भाजपा के ‘महिला विरोधी’ चेहरे को उजागर करने का दावा

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आज सियासी पारा उस वक्त चढ़ गया जब कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता के जरिए केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों को आड़े हाथों लिया। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय (कांग्रेस भवन) में आयोजित इस वार्ता में उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के मुद्दे पर भाजपा की नीयत और नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए। इस दौरान उनके साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी मौजूद रहे और दोनों नेताओं ने एकजुट होकर राज्य की महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा।

प्रेसवार्ता के मुख्य बिंदु: अधिनियम पर तीखे सवाल

सुप्रिया श्रीनेत ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर भाजपा पर प्रहार करते हुए इसे महिलाओं के साथ किया गया एक “क्रूर मजाक” करार दिया।

  • अधिनियम में देरी पर हमला: उन्होंने कहा कि भाजपा जिस अधिनियम का ढिंढोरा पीट रही है, वह वास्तव में एक “झुनझुना” है क्योंकि इसमें परिसीमन और जनगणना जैसी पेचीदगियां जोड़कर इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है।
  • कांग्रेस का रुख: सुप्रिया ने दावा किया कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं को तुरंत आरक्षण देने की पक्षधर रही है, जबकि भाजपा केवल चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है।

गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार को घेरा

प्रेसवार्ता में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने उत्तराखंड के स्थानीय संदर्भों को जोड़ते हुए धामी सरकार पर निशाना साधा।

  • महिला सुरक्षा का मुद्दा: गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड में अंकिता भंडारी जैसे मामलों में न्याय की स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि भाजपा राज में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं।
  • विपक्ष की एकजुटता: उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों में कांग्रेस “नारी शक्ति” के अपमान और आरक्षण के नाम पर की जा रही राजनीति को जनता के बीच ले जाएगी।

भाजपा पर ‘महिला विरोधी’ होने का आरोप

सुप्रिया श्रीनेत ने अपनी बात को विस्तार देते हुए भाजपा नेताओं के पुराने बयानों और हालिया घटनाक्रमों का हवाला दिया।

  • चुनावी स्टंट की संज्ञा: कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि जब-जब भाजपा की जमीन खिसकने लगती है, वह इसी तरह के खोखले वादे लेकर सामने आती है। उन्होंने सवाल पूछा कि यदि सरकार की नीयत साफ थी, तो इस अधिनियम को तत्काल प्रभाव से लागू करने का प्रावधान क्यों नहीं किया गया?
  • अधिकारों की लड़ाई: उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी सड़कों से लेकर सदन तक महिलाओं के वास्तविक हक की लड़ाई लड़ती रहेगी और भाजपा के इस “छलावे” का पर्दाफाश करेगी।

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