देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। वर्तमान में प्रदेश भर के विद्यालयों में प्रवक्ताओं (Lecturers) के कुल 3670 पद रिक्त चल रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों की है, जहाँ शिक्षकों के न होने से छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लगा है। आगामी बोर्ड परीक्षाओं और नए शैक्षणिक सत्र से पहले पदों का न भरा जाना सरकार और विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
विषयवार रिक्तियों का गणित: मुख्य विषयों में सबसे बुरा हाल
शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, रिक्त पदों की संख्या ने शिक्षण कार्य को लगभग ठप कर दिया है:
- विज्ञान वर्ग: भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों में सैकड़ों पद खाली हैं। प्रयोगात्मक परीक्षाओं के समय शिक्षकों की अनुपस्थिति छात्रों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है।
- गणित और अंग्रेजी: इन दो विषयों में स्थिति सबसे विकट है। दुर्गम और अति-दुर्गम क्षेत्रों के कई विद्यालयों में तो एक भी प्रवक्ता तैनात नहीं है, जिससे कोर्स पूरा होना असंभव लग रहा है।
- पहाड़ी जिलों में संकट: पौड़ी, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे जिलों के सरकारी स्कूलों में रिक्तियों का प्रतिशत सबसे अधिक है।
पदोन्नति और सीधी भर्ती के बीच उलझा मामला
शिक्षकों की इस कमी के पीछे मुख्य कारण विभागीय पदोन्नति (DPC) में देरी और सीधी भर्ती की प्रक्रिया का सुस्त होना बताया जा रहा है:
- पदोन्नति का इंतज़ार: एलटी (LT) कैडर से प्रवक्ता पद पर होने वाली पदोन्नतियां लंबे समय से विवादों और अदालती मामलों के कारण रुकी हुई हैं।
- सीधी भर्ती में विलंब: उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) के माध्यम से होने वाली नई भर्तियों की प्रक्रिया अभी भी पाइपलाइन में है, जिससे नए शिक्षकों की नियुक्ति में समय लग रहा है।
- अतिथि शिक्षकों के भरोसे व्यवस्था: फिलहाल सरकार अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) के माध्यम से काम चलाने की कोशिश कर रही है, लेकिन उनकी संख्या भी मांग के मुकाबले काफी कम है।
छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश
विद्यालयों में गुरुजी न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावकों में गहरा रोष है:
- बोर्ड परीक्षा का डर: 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं नजदीक हैं। मुख्य विषयों के शिक्षक न होने से छात्र बिना कोचिंग के पास होने की उम्मीद खो रहे हैं।
- पलायन की मजबूरी: अच्छे शिक्षकों के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों से लोग अपने बच्चों को शहरों के निजी स्कूलों में भेजने के लिए मजबूर हैं, जो उत्तराखंड में पलायन का एक बड़ा कारण बन रहा है।




