देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की निगरानी को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य में लागू किए गए नए प्रावधानों के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की जाएगी। इनमें पांच लाख रुपये तक का जुर्माना, प्रशासक की नियुक्ति और गंभीर मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने जैसे कदम शामिल हैं।
सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025 में संशोधन किया है। नए नियमों के तहत संस्थानों को निर्धारित मानकों का पालन करना होगा और शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक कामकाज तथा वित्तीय गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराने होंगे।
अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई मदरसा या अल्पसंख्यक शिक्षण संस्था नियमों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर सरकार संस्था के संचालन के लिए प्रशासक भी नियुक्त कर सकेगी। वहीं, गंभीर अनियमितताओं की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है।
राज्य सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, संस्थानों की जवाबदेही तय करना और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मानकों का पालन करने वाले संस्थानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी, लेकिन नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
नए कानून के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के नियमन के लिए व्यवस्था में बदलाव किया गया है। इससे पहले राज्य में मदरसा शिक्षा बोर्ड की व्यवस्था थी, जिसे नए ढांचे के तहत बदला गया है। नए प्राधिकरण के माध्यम से संस्थानों की मान्यता, नियमन और शैक्षणिक मानकों की निगरानी की जाएगी।
सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश में संचालित मदरसों की व्यवस्थाओं और मानकों की जांच प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। वहीं, मदरसा संचालकों से भी नए नियमों के अनुरूप रिकॉर्ड और व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने को कहा गया है।





