देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने शहरी और आबादी क्षेत्रों की जमीनों के रिकॉर्ड को आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड आबादी सर्वेक्षण एवं अभिलेख संक्रिया नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी गई। इसके लागू होने के बाद आबादी क्षेत्र की जमीनों का सर्वे कर व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
नई व्यवस्था का उद्देश्य जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक सटीक, पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। मौजूदा समय में आबादी क्षेत्रों की कई जमीनों के रिकॉर्ड स्पष्ट या आधुनिक स्वरूप में उपलब्ध नहीं हैं। इससे स्वामित्व और सीमांकन को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से ऐसे मामलों में कमी आने की उम्मीद है।
आधुनिक तकनीक से होगा सर्वे
नियमावली के तहत आबादी क्षेत्रों के सर्वेक्षण में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के अंतर्गत NAKSHA कार्यक्रम जैसी तकनीकी व्यवस्था के जरिए भूमि का सर्वे और रिकॉर्ड तैयार करने की योजना है। इससे नक्शों और भूमि संबंधी विवरण को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि सटीक डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से जमीन की खरीद-बिक्री, स्वामित्व निर्धारण और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही राजस्व विभाग के लिए भी भूमि संबंधी जानकारी का रखरखाव और सत्यापन आसान होगा।
भूमि विवाद कम होने की उम्मीद
आबादी क्षेत्रों में जमीन की सीमाओं और स्वामित्व को लेकर होने वाले विवाद लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती रहे हैं। डिजिटल सर्वे और अभिलेख तैयार होने के बाद भूमि की स्थिति अधिक स्पष्ट होने की संभावना है। इससे भविष्य में विवादों को रोकने और मौजूदा मामलों के निपटारे में भी मदद मिल सकती है।
कैबिनेट के इस फैसले को उत्तराखंड में भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य आबादी क्षेत्रों की जमीन से संबंधित जानकारी को अधिक व्यवस्थित, सुलभ और विश्वसनीय बनाना है।





