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उत्तराखंड के 131 गांव और तीन कस्बों में सितंबर से होगी जनगणना, बर्फीले क्षेत्रों को मिलेगी प्राथमिकता

देहरादून। उत्तराखंड के दुर्गम और हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना की प्रक्रिया सितंबर 2026 से शुरू की जाएगी। राज्य के 131 गांवों और तीन नगरीय क्षेत्रों में जनगणना कार्य विशेष कार्यक्रम के तहत कराया जाएगा। यह क्षेत्र सामान्य जनगणना से अलग समय पर कवर किए जाएंगे, ताकि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सही आंकड़े जुटाए जा सकें।

जनगणना निदेशालय के अनुसार, यह अभियान प्रदेश के चार हिमाच्छादित जिलों—चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी—के दुर्गम इलाकों में चलाया जाएगा। इन क्षेत्रों में मौसम की चुनौती को देखते हुए सितंबर माह में ही जनगणना पूरी करने की योजना बनाई गई है।

अधिकारियों के मुताबिक, इस बार जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है। पहली बार लोगों को स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके माध्यम से नागरिक प्रगणकों के पहुंचने से पहले ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद भी प्रगणक घर-घर जाकर विवरण का सत्यापन करेंगे।

उत्तराखंड में जनगणना-2027 के तहत पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास गणना का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए राज्यभर में प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की तैनाती की जा रही है। डिजिटल माध्यम से आंकड़े एकत्र किए जाने से प्रक्रिया को तेज और अधिक पारदर्शी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

दुर्गम क्षेत्रों में समय से जनगणना पूरी करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी और सीमित आवागमन को देखते हुए केंद्र सरकार ने ऐसे क्षेत्रों के लिए अलग समय-सारिणी निर्धारित की है।

जनगणना से जुटाए गए आंकड़े राज्य की भविष्य की योजनाओं, विकास कार्यों, संसाधनों के वितरण और नीतिगत फैसलों के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेंगे।

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