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ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई, ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ में छह नौकाएं, मिसाइलें और ड्रोन नष्ट

वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान से जुड़े लक्ष्यों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए छह ईरानी नौकाओं के साथ मिसाइलों और ड्रोन सिस्टम को नष्ट करने का दावा किया है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नामक सैन्य अभियान के तहत की गई, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बलों और सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) से जुड़े सूत्रों ने बताया कि यह अभियान ऐसे समय में चलाया गया जब खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां असामान्य रूप से बढ़ गई थीं और अमेरिकी सैन्य ठिकानों तथा व्यापारिक जहाजों को संभावित खतरे की आशंका जताई जा रही थी। अमेरिकी सेना का कहना है कि खुफिया जानकारी के आधार पर ईरान समर्थित तत्वों की गतिविधियों की निगरानी की जा रही थी और खतरे की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की गई।

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त ऑपरेशन में भाग लिया। कार्रवाई के दौरान समुद्र में सक्रिय छह तेज रफ्तार नौकाओं को निशाना बनाया गया, जिन्हें हथियार और ड्रोन संचालन से जोड़ा जा रहा था। इसके अलावा मिसाइल लॉन्चिंग क्षमता से लैस उपकरणों और ड्रोन सिस्टम को भी नष्ट कर दिया गया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह कदम आत्मरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया।

अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि हाल के महीनों में लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर हमलों और ड्रोन गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। इसी पृष्ठभूमि में “प्रोजेक्ट फ्रीडम” के तहत समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और संभावित हमलों को रोकने की रणनीति अपनाई गई। अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका अपने सैनिकों, व्यापारिक जहाजों और सहयोगी देशों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।

दूसरी ओर ईरान की ओर से इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया की संभावना जताई जा रही है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर तत्काल विस्तृत बयान सामने नहीं आया, लेकिन क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पहले से तनावपूर्ण अमेरिका-ईरान संबंधों को और जटिल बना सकता है। पश्चिम एशिया में पहले से जारी भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों के कारण स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर डाल सकती हैं। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी सैन्य टकराव का प्रभाव वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है।

अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उसका अभियान किसी व्यापक युद्ध की शुरुआत नहीं बल्कि संभावित खतरे को रोकने के लिए सीमित सैन्य कार्रवाई है। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि ईरान की प्रतिक्रिया क्या रहती है और आने वाले दिनों में क्षेत्रीय तनाव किस दिशा में जाता है।

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