Top 5 This Week

Related Posts

ईरान पर अमेरिका ने कसा प्रतिबंधों का शिकंजा, चार भारतीय कंपनियां भी निशाने पर

वाशिंगटन। अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए प्रतिबंधों का दायरा और विस्तृत कर दिया है। ट्रंप प्रशासन की नई कार्रवाई में ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार से कथित तौर पर जुड़े चार भारत स्थित कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों को भी प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया गया है। यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों के लिए भी चुनौती बन सकता है।

अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की तेल और वित्तीय आय के स्रोतों को सीमित करना है। वाशिंगटन ने ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों और संस्थाओं पर भी दबाव बढ़ाया है। अमेरिका की इस नीति के तहत उन देशों और कारोबारियों को भी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जो प्रतिबंधों के बावजूद तेहरान के साथ कुछ खास तरह का व्यापार जारी रखते हैं।

भारत और ईरान के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। ईरान भारत के लिए ऊर्जा और क्षेत्रीय संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण है। चाबहार बंदरगाह परियोजना भी दोनों देशों के सहयोग का प्रमुख उदाहरण है। ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंधों के बढ़ते दायरे से भारतीय कंपनियों के लिए ईरान के साथ कारोबार करना अधिक जटिल हो सकता है।

हालिया प्रतिबंधों से पहले भी अमेरिकी दबाव का असर भारत-ईरान व्यापार पर पड़ा है। भारत का ईरान को निर्यात मुख्य रूप से चावल, चाय और दवाओं जैसे क्षेत्रों में रहा है। नई पाबंदियों और भुगतान तथा परिवहन संबंधी मुश्किलों के कारण इन कारोबारों की लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

अमेरिका की नई कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और रणनीतिक मुद्दों को लेकर पहले से कई महत्वपूर्ण बातचीत चल रही है। ईरान के साथ भारत के संबंधों पर अमेरिकी दबाव बढ़ने से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संतुलन की चुनौती भी बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय हितों और अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी के बीच संतुलन साधना होगा। वहीं, वाशिंगटन का बढ़ता प्रतिबंध अभियान ईरान के साथ कारोबार करने वाले अन्य देशों के लिए भी बड़ा आर्थिक जोखिम बनता जा रहा है।

 

 

Popular Articles