नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने की पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अमेरिकी राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी सीनेट के एक वरिष्ठ सदस्य ने पाकिस्तान की इस भूमिका को “गलत समय पर उठाया गया कदम” बताते हुए उसकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मामला तब और चर्चा में आया जब पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में मध्यस्थता की कोशिशें तेज कीं। इस पर अमेरिकी सीनेटर ने कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में किसी भी मध्यस्थ देश की निष्पक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, लेकिन पाकिस्तान के संदर्भ में यह सवाल उठते हैं कि क्या वह वास्तव में तटस्थ भूमिका निभा सकता है।
सीनेटर ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान के क्षेत्रीय संबंध और उसकी विदेश नीति कई बार विवादों में रही है, जिससे उसकी मध्यस्थता की क्षमता पर संदेह पैदा होता है। उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह की कूटनीतिक पहल से शांति प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
अमेरिकी पक्ष की इस टिप्पणी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान–अमेरिका जैसे संवेदनशील संबंधों में किसी भी तीसरे देश की भूमिका अत्यंत सावधानी और संतुलन के साथ होनी चाहिए, क्योंकि जरा सी असंतुलनपूर्ण स्थिति पूरी वार्ता प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
उधर पाकिस्तान की ओर से अब तक इस टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन वह लगातार यह दावा करता रहा है कि वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए सकारात्मक भूमिका निभा रहा है।
कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि मध्यस्थता की यह कोशिश ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है। ऐसे में किसी भी देश की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेह और समर्थन दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
यह पूरा मामला वैश्विक कूटनीति में बदलते समीकरणों और मध्यस्थ देशों की भूमिका पर एक बार फिर सवाल खड़े कर रहा है।






