अल्मोड़ा। साइबर ठगी और अवैध लेनदेन पर अंकुश लगाने के लिए अल्मोड़ा पुलिस ने एक सप्ताह तक चलाए गए सघन चेकिंग अभियान में नौ संदिग्ध म्यूल अकाउंट पकड़े हैं। पुलिस ने इन खातों के धारकों को चिन्हित कर जिले के अलग-अलग नौ थानों में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही इन खातों के पीछे सक्रिय साइबर गिरोह के नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के लिए आई4सी (इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर) से गोपनीय डेटा प्राप्त हुआ था। इसमें ऐसे बैंक खातों की जानकारी थी, जिनमें अचानक बड़ी रकम का संदिग्ध लेनदेन सामने आया था।
जांच में सामने आए नौ संदिग्ध खाते
आई4सी से मिले इनपुट के आधार पर साइबर सेल और स्थानीय थाना पुलिस ने संबंधित बैंकों तथा खाताधारकों से संपर्क कर खातों का सत्यापन किया। जांच और निगरानी के दौरान नौ बैंक खाते संदिग्ध म्यूल अकाउंट के रूप में सामने आए।
पुलिस के अनुसार, इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को जमा करने, दूसरे खातों में भेजने या रकम छिपाने के लिए किया जा रहा था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों का संचालन कौन कर रहा था और इनके पीछे साइबर अपराधियों का कितना बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए करते हैं। कई बार लोग कमीशन या आसान कमाई के लालच में अपना बैंक खाता दूसरों को इस्तेमाल करने के लिए दे देते हैं। बाद में यही खाते साइबर अपराध में इस्तेमाल पाए जाते हैं।
अल्मोड़ा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर घोडके ने लोगों से अपील की है कि वे अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या मोबाइल सिम किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
पुलिस ने नागरिकों से संदिग्ध कॉल, लिंक और आसान कमाई के लालच से सावधान रहने तथा साइबर ठगी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।





