वॉशिंगटन: अमेरिका ने एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम के तहत जारी होने वाले J-1 वीजा नियमों को और सख्त करने का प्रस्ताव रखा है। नए बदलावों के तहत वीजा धारकों की निगरानी बढ़ाने, नियमों के पालन को कड़ा करने और प्रायोजक संस्थानों की जिम्मेदारियां बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इस कदम का असर बड़ी संख्या में भारतीय शोधकर्ताओं, डॉक्टरों, शिक्षकों और प्रशिक्षुओं पर पड़ सकता है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य J-1 वीजा कार्यक्रम में पारदर्शिता और अनुपालन सुनिश्चित करना है। नए नियमों के तहत वीजा प्रायोजक संस्थानों को प्रतिभागियों की गतिविधियों की बेहतर निगरानी करनी होगी और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकता है।
J-1 वीजा अमेरिका के प्रमुख सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में से एक है। इसके जरिए विदेशी छात्र, शोधकर्ता, मेडिकल प्रशिक्षु, प्रोफेसर और अन्य पेशेवर सीमित अवधि के लिए अमेरिका जाते हैं। भारत से बड़ी संख्या में लोग इस श्रेणी के वीजा का इस्तेमाल करते हैं।
प्रस्तावित बदलावों में अमेरिकी अधिकारियों को वीजा प्रतिभागियों की स्थिति समाप्त करने के संबंध में अधिक अधिकार दिए जाने की बात भी सामने आई है। इससे वीजा धारकों को अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ सकती है।
इससे पहले अमेरिका ने विदेशी छात्रों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों से जुड़े लोगों और पत्रकारों के वीजा नियमों में भी बदलाव किए हैं, जिनमें ठहरने की अवधि को निश्चित करने का प्रावधान शामिल है। इन बदलावों से अमेरिका जाने वाले भारतीयों पर प्रभाव पड़ने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नए J-1 नियम लागू होने से पहले प्रस्ताव पर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अंतिम फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भारतीय आवेदकों और मौजूदा वीजा धारकों पर इसका कितना असर पड़ेगा।





