न्यूयॉर्क। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अपने संबोधन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ की और 2025 में भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के दौरान उनके हस्तक्षेप का उल्लेख किया। शरीफ ने दावा किया कि ट्रंप की पहल से दोनों परमाणु-संपन्न देशों के बीच तनाव कम हुआ। भारत हालांकि युद्धविराम को अमेरिकी मध्यस्थता का परिणाम बताए जाने के दावे को लगातार खारिज करता रहा है।
शरीफ ने कहा कि दक्षिण एशिया को दोबारा गंभीर सैन्य तनाव की स्थिति में पहुंचने से रोकने के लिए कश्मीर मुद्दे का समाधान जरूरी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के तहत कश्मीर में जनमत संग्रह की मांग भी दोहराई। भारत का रुख है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और भारत-पाकिस्तान के मुद्दों को द्विपक्षीय रूप से सुलझाया जाना चाहिए।
सिंधु जल संधि पर कड़ा बयान
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने सिंधु जल संधि का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने भारत के संधि को स्थगित रखने के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसका कोई कानूनी आधार नहीं है। शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या उसका रुख मोड़ने की किसी भी कोशिश को पाकिस्तान ‘युद्ध की कार्रवाई’ मानेगा।
सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। भारत ने इस कदम को आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए उपायों से जोड़ा है।
2025 के संघर्ष का भी किया जिक्र
शरीफ ने 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का उल्लेख करते हुए पाकिस्तानी सेना की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि ट्रंप के हस्तक्षेप के समय दोनों देश व्यापक संघर्ष के मुहाने पर थे। भारत ने हालांकि संघर्ष के दौरान किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया है।
अपने भाषण में शरीफ ने पश्चिम एशिया, सऊदी अरब और ईरान-अमेरिका तनाव समेत कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी पाकिस्तान का पक्ष रखा।




