न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में भारत के फर्स्ट सेक्रेटरी रघू पुरी ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने जिन आतंकी संगठनों को कथित रूप से बढ़ावा दिया, उन पर अब उसका नियंत्रण नहीं रहा और वही आतंकवाद पाकिस्तान के लिए भी चुनौती बन गया है।
रघू पुरी ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को आतंकवाद का पीड़ित और उससे लड़ने वाला देश बताता है, लेकिन भारत का आरोप है कि उसकी नीतियों में आतंकवाद को समर्थन देने की भूमिका रही है। उन्होंने इसी संदर्भ में ‘फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर’ का उदाहरण देते हुए कहा कि आतंकवाद अब उन लोगों के लिए भी खतरा बन गया है जिन्होंने इसे बढ़ावा दिया।
26/11 और पहलगाम का किया जिक्र
भारतीय प्रतिनिधि ने अपने बयान में मुंबई के 26/11 आतंकी हमले और पहलगाम आतंकी हमले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया इन घटनाओं को नहीं भूली है और आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस कार्रवाई जरूरी है।
उन्होंने पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए कहा कि पीड़ितों से उनकी धार्मिक पहचान पूछकर उन्हें निशाना बनाया गया था। भारत ने इस घटना को सीमा पार आतंकवाद से जोड़ते हुए पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर पर भी जवाब
भारतीय प्रतिनिधि ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान की ओर से किए गए जीत के दावों को भी खारिज किया। उन्होंने पाकिस्तान के इन दावों को गलत सूचना और प्रचार का हिस्सा बताया। भारत ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में केवल आतंकियों पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि उन्हें समर्थन, धन और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के खिलाफ मजबूत अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही आतंकवाद की फंडिंग रोकने और आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने की बात कही।
भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर संयुक्त राष्ट्र में यह बयानबाजी दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक तनाव को एक बार फिर सामने लाती है।





