नई दिल्ली/कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक कलह अब बड़े राजनीतिक संकट में बदलती नजर आ रही है। पार्टी के करीब 20 लोकसभा सांसदों के एक बागी गुट के सामने आने और NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के समर्थन की दिशा में बढ़ने की खबरों ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार, यह बागी गुट न केवल पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट है, बल्कि उसने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अपने लिए अलग संसदीय गुट के रूप में मान्यता देने की मांग भी की है। यह घटनाक्रम TMC के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि लोकसभा में पार्टी की कुल संख्या 28 सांसदों की है।
जानकारी के मुताबिक, इस बागी गुट के कई सांसदों ने हाल ही में दिल्ली में एक बैठक की, जिसमें भाजपा और केंद्र सरकार से जुड़े कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत होने की बात सामने आई है। इस बैठक को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें भविष्य की रणनीति और संभावित गठबंधन को लेकर चर्चा हुई।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि इस बैठक में 13 से 16 सांसदों की मौजूदगी रही, जबकि बागी गुट का दावा है कि कुल मिलाकर 20 सांसद उनके साथ हैं। यदि यह संख्या सही साबित होती है, तो यह TMC के लिए दो-तिहाई बहुमत के दायरे को पार कर सकता है, जो दलबदल कानून के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
पार्टी के भीतर इस घटनाक्रम को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। वरिष्ठ नेताओं ने इसे “दलबदल और विश्वासघात” करार दिया है, जबकि बागी गुट का कहना है कि यह कदम “राष्ट्रीय हित और क्षेत्रीय असंतोष” के कारण उठाया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम न केवल TMC की संसदीय ताकत को कमजोर कर सकता है, बल्कि लोकसभा में सत्ता संतुलन पर भी असर डाल सकता है। अगर यह बगावत और आगे बढ़ती है, तो NDA के लिए यह संसद में संख्याबल के लिहाज से बड़ी बढ़त साबित हो सकती है।
फिलहाल, TMC नेतृत्व की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस “संभावित विभाजन” को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।





