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SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, 17 राज्यों में वोटर लिस्ट का होगा विशेष पुनरीक्षण

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद और विपक्ष के विरोध के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) कराने का ऐलान किया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य नए और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना, सूची में गलतियों को सुधारना और मतदाता सूची को अपडेट करना है।

आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता की कटऑफ तारीख निर्धारित की गई है।

यूपी-पंजाब समेत इन राज्यों में होगी प्रक्रिया

चुनाव आयोग के इस फैसले के दायरे में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, केरल, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और असम समेत 17 राज्य व केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इनमें अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, पुडुचेरी और लक्षद्वीप भी शामिल हैं।

इनमें से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मतदाता सूची को दुरुस्त करने की यह कवायद राजनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है।

नवंबर में जारी होगी ड्राफ्ट सूची

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूची का प्रारूप यानी ड्राफ्ट रोल 12 नवंबर को प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, संशोधन कराने और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। दावों और आपत्तियों की अवधि 11 दिसंबर तक रहेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित की जाएगी।

SIR और SSR में क्या है अंतर?

विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) में नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, पते में बदलाव और मतदाता सूची की त्रुटियों को सुधारने पर जोर रहता है। वहीं, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत व्यापक सत्यापन किया जाता है, जिसमें मतदाताओं के विवरण की जांच भी शामिल है।

SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इससे पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटने का खतरा है। विपक्ष ने प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है। यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।

चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सटीक और समावेशी बनाना जरूरी है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे।

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