नई दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा लाभांश (डिविडेंड) ₹2.87 लाख करोड़ ट्रांसफर किया है। यह राशि पिछले वर्ष के रिकॉर्ड ₹2.69 लाख करोड़ से भी अधिक है और सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है।
आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड ने हाल ही में हुई बैठक में इस सरप्लस ट्रांसफर को मंजूरी दी। यह फैसला बैंक की मजबूत बैलेंस शीट और विदेशी मुद्रा संचालन से हुए लाभ के आधार पर लिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में उतार–चढ़ाव के बीच विदेशी मुद्रा बिक्री और निवेश से आरबीआई की आय में वृद्धि हुई है, जिससे यह रिकॉर्ड लाभांश संभव हुआ।
हालांकि यह राशि रिकॉर्ड स्तर पर है, फिर भी यह सरकार के बजट अनुमान से थोड़ी कम बताई जा रही है। बजट में सरकार ने आरबीआई और अन्य वित्तीय संस्थानों से इससे अधिक डिविडेंड प्राप्त होने का अनुमान लगाया था।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह अतिरिक्त राजस्व सरकार को राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने और विकास योजनाओं के लिए संसाधन उपलब्ध कराने में मदद करेगा। लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी जा रही है कि सरकार की आरबीआई के लाभांश पर बढ़ती निर्भरता दीर्घकाल में नीति संतुलन के लिए चुनौती बन सकती है।
आरबीआई ने अपने आर्थिक पूंजी ढांचे (Economic Capital Framework) के तहत जोखिम प्रावधानों में भी समायोजन किया है, जिससे सरप्लस ट्रांसफर की यह राशि संभव हुई।
कुल मिलाकर, यह रिकॉर्ड डिविडेंड केंद्र सरकार के लिए एक बड़ा वित्तीय सहारा साबित हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं और घरेलू खर्च की जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं।





