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NEET पेपर लीक: CBI ने जांच का दायरा बढ़ाया, शिक्षक और पार्लर मालिक फंसे जांच के दायरे में

जयपुर। राष्ट्रीय पात्रतास्नातक परीक्षा (NEET) के हालिया पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, अब इस मामले में एक स्कूल शिक्षक और एक पार्लर मालिक को भी जांच के दायरे में लिया गया है।

CBI के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कुछ संदिग्ध गतिविधियों का पता चला था। इसके बाद एजेंसी ने शिक्षक और पार्लर मालिक की ओर से मोबाइल और डिजिटल डेटा की जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि पार्लर मालिक की भूमिका सूचना के आदानप्रदान और पेपर की प्रतिलिपि वितरण में हो सकती है।

इस मामले का संबंध केवल कुछ छात्रों तक सीमित नहीं है। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह एक संगठित नेटवर्क हो सकता है, जिसमें कई लोग शामिल हैं। इसलिए CBI ने राज्य और जिले की पुलिस से भी सहयोग लिया है।

शिक्षक के खिलाफ आरोप है कि उसने छात्रों को परीक्षा से पहले पेपर की जानकारी उपलब्ध कराई। वहीं पार्लर मालिक से जुड़े तथ्य जांच के तहत हैं, क्योंकि उसका नाम डिजिटल सबूत और संदेशों में उभरकर सामने आया। अधिकारियों ने यह भी कहा कि जल्द ही और लोगों के शामिल होने की संभावना है।

इस बीच, NEET परीक्षा में शामिल छात्रों और अभिभावकों में चिंता की लहर है। परीक्षा नियंत्रक बोर्ड ने छात्रों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर ध्यान दें और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करें।

इससे पहले, NEET परीक्षा पेपर लीक मामले की शिकायत कुछ अभिभावकों और छात्रों ने की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI ने स्वत: संज्ञान लेकर जांच शुरू की थी। एजेंसी ने शुरुआती चरण में कई संदिग्धों से पूछताछ की थी, जिनमें शिक्षक और पार्लर मालिक के नाम प्रमुख हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि डिजिटल सुरक्षा और परीक्षा निगरानी को और कड़ा किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे पेपर लीक की घटनाओं को रोका जा सके।

CBI अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह गोपनीय रखी जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी शिक्षक और पार्लर मालिक से संबंधित सभी डिजिटल साक्ष्यों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुरक्षित किया गया है।

इस पूरे मामले से स्पष्ट है कि NEET जैसे राष्ट्रीय स्तर के परीक्षा परंपरा और ईमानदारी के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है। जांच के निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई से शिक्षा जगत में नया संदेश जाएगा कि परीक्षा में किसी भी तरह का अनुचित लाभ लेना गंभीर अपराध है।

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