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NCERT ने 9वीं से 12वीं के छात्रों के लिए शुरू किया AI पाठ्यक्रम, डीपफेक और डेटा सुरक्षा की मिलेगी जानकारी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित 20 घंटे का परिचयात्मक मॉड्यूल शुरू किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को एआई तकनीक की कार्यप्रणाली समझाने के साथ इसके सुरक्षित, जिम्मेदार और नैतिक इस्तेमाल के लिए तैयार करना है।

यह मॉड्यूल आईआईटी मद्रास, आईआईटी जोधपुर और एनसीईआरटी के विशेषज्ञों के सहयोग से तैयार किया गया है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप विकसित किया गया है। खास बात यह है कि इसे इस तरह तैयार किया गया है कि कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा के बिना भी स्कूलों में गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाई कराई जा सके। 

पांच प्रमुख विषयों पर होगा फोकस

पाठ्यक्रम में एआई के दैनिक जीवन में उपयोग, मशीनों के सीखने की प्रक्रिया, एआई से होने वाली गलतियां, व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और आधुनिक एआई टूल्स के इस्तेमाल जैसे विषय शामिल हैं। विद्यार्थियों को यह समझाया जाएगा कि एआई से मिलने वाली हर जानकारी सही नहीं होती, इसलिए किसी भी उत्तर पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच करना जरूरी है।

डीपफेक और फर्जी खबरों की पहचान सीखेंगे छात्र

मॉड्यूल में विद्यार्थियों को डीपफेक वीडियो और ऑडियो, भ्रामक सूचनाओं तथा इंटरनेट मीडिया पर फैलने वाली फर्जी खबरों की पहचान करने के तरीके सिखाए जाएंगे। इसके साथ ही उन्हें डिजिटल गोपनीयता, व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और एआई के नैतिक इस्तेमाल के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।

विद्यार्थियों को समझाया जाएगा कि पासवर्ड, ओटीपी और अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी एआई टूल्स पर साझा करने से बचना चाहिए।

रटने के बजाय गतिविधियों से सीखेंगे

एनसीईआरटी ने इस पाठ्यक्रम को गतिविधि आधारित बनाया है। इसमें व्यावहारिक अभ्यास, चर्चा और समस्याओं को हल करने पर जोर दिया जाएगा। छात्र एआई टूल्स के लिए प्रभावी निर्देश तैयार करना और उनसे मिले परिणामों की जांच करना भी सीखेंगे।

पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल तकनीक का उपयोगकर्ता बनाना नहीं, बल्कि उन्हें तकनीक की सीमाएं समझने, गलतियों की पहचान करने और अपने विवेक से निर्णय लेने में सक्षम बनाना है।

इस पहल से स्कूली शिक्षा में उभरती तकनीकों को शामिल करने और विद्यार्थियों में तार्किक सोच, रचनात्मकता तथा डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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