नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान और कश्मीर को लेकर दिए गए बयान पर विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी के बाद अब कई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी उनकी टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई है। धर्मगुरुओं ने बयान को अनुचित बताते हुए फारूक अब्दुल्ला से स्पष्टीकरण देने और माफी मांगने की मांग की है।
मौलाना साजिद राशिदी ने की आलोचना
अखिल भारतीय इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद राशिदी ने फारूक अब्दुल्ला के बयान की निंदा करते हुए इसे देशद्रोह के समान बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता रहा है, ऐसे में उसके पक्ष में इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है।
राशिदी ने पहलगाम आतंकी हमले और पुलवामा हमले का भी उल्लेख करते हुए पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर बयान देते समय जिम्मेदारी बरतनी चाहिए।
अन्य धर्मगुरुओं ने भी जताई नाराजगी
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली और मौलाना सैफ अब्बास ने भी फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी पर असहमति जताई। दोनों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा के मामले में किसी दूसरे देश पर निर्भरता जताना उचित नहीं है।
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने फारूक अब्दुल्ला से अपने बयान पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने और माफी मांगने की मांग की। उन्होंने टिप्पणी को आपत्तिजनक और निंदनीय बताया।
बारामूला की रैली में दिया था बयान
फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को कश्मीर घाटी के बारामूला जिले में एक रैली के दौरान केंद्र सरकार की कश्मीर नीति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाकर वहां के लोगों की रक्षा में भूमिका निभा रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।
भाजपा नेताओं ने भी फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी की आलोचना करते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की है। इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।





