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ISRO का बड़ा कदम: चंद्र मिशनों के लिए विकसित की जा रही एडवांस हीटर तकनीक, लैंडर की उम्र 200 दिन तक बढ़ाने की तैयारी

नई दिल्ली, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भविष्य के चंद्र अभियानों को लेकर एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकास की दिशा में काम शुरू किया है। ISRO वैज्ञानिकों ने ऐसी उन्नत “आर्टिफिशियल हीटर” तकनीक विकसित करने की योजना बनाई है, जिससे चंद्रमा पर भेजे जाने वाले लैंडर की कार्यक्षमता को 100 से 200 दिनों तक बढ़ाया जा सकेगा।

ISRO के अनुसार, यह पहल विशेष रूप से चंद्रमा की कठोर परिस्थितियों—विशेषकर अत्यधिक ठंड और लंबे “लूनर नाइट” (चंद्र रात्रि) के दौरान—से उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए की जा रही है। अब तक चंद्र अभियानों में लैंडर केवल लगभग 14 दिनों (एक चंद्र दिवस) तक ही काम कर पाते हैं, क्योंकि इसके बाद सूर्य की रोशनी समाप्त हो जाती है और ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो जाती है।

ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने जानकारी दी कि यह परियोजना परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के सहयोग से विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चंद्रमा की रात में तापमान में भारी गिरावट के बावजूद लैंडर के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित और सक्रिय बने रहें।

वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्रमा पर तापमान दिन में अत्यधिक गर्म और रात में अत्यंत ठंडा हो जाता है, जिससे उपकरणों के खराब होने का खतरा रहता है। नई हीटिंग तकनीक इस समस्या का समाधान कर सकती है और भविष्य के मिशनों को लंबे समय तक वैज्ञानिक डेटा एकत्र करने में सक्षम बनाएगी।

इस तकनीक को सफल माना जाता है तो भारत के आगामी चंद्र अभियानों को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे न केवल मिशन की अवधि बढ़ेगी बल्कि चंद्र सतह पर अधिक विस्तृत शोध और प्रयोग संभव हो सकेंगे।

ISRO का यह कदम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो भविष्य में दीर्घकालिक चंद्र अन्वेषण और मानव मिशनों की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।

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