वॉशिंगटन। अमेरिका में एक भारतीय-अमेरिकी CEO अपनी अमेरिकी नागरिकता खोने की स्थिति में हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने उनके खिलाफ आरोप लगाया है कि उन्होंने H-1B वीजा के आवेदन में धोखाधड़ी की थी। यह मामला अमेरिकी आव्रजन विभाग और न्याय विभाग की संयुक्त जांच के बाद सामने आया है।
सूत्रों के अनुसार, CEO पर आरोप है कि उन्होंने H-1B वीजा आवेदन प्रक्रिया में झूठी जानकारी दी और वीजा की पात्रता को प्रभावित किया। जांच अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के धोखाधड़ी वाले मामले गंभीर अपराध माने जाते हैं और नागरिकता की वैधता पर असर डाल सकते हैं।
अमेरिकी कानून के तहत, अगर किसी नागरिक ने नागरिक बनने से पहले या बाद में धोखाधड़ी की हो, तो उसे अमेरिकी नागरिकता रद्द की जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला अन्य H-1B वीजा धारकों और टेक उद्योग में नियामक दृष्टि से एक चेतावनी है।
वर्तमान में CEO अपने पद पर बने हुए हैं, लेकिन मामले की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक उनके नागरिक अधिकार और कानूनी स्थिति अस्थिर बनी हुई है। अमेरिकी न्याय विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में केवल तथ्य और प्रमाणों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय और तकनीकी उद्योग में चर्चा को जन्म दिया है, क्योंकि H-1B वीजा के माध्यम से अमेरिका में काम कर रहे पेशेवरों के लिए नियमों का उल्लंघन गंभीर परिणाम ला सकता है।





