लंदन/वॉशिंगटन। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की खुफिया एजेंसियों के गठबंधन “Five Eyes” ने उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसियों का कहना है कि आने वाले कुछ महीनों में ऐसे AI मॉडल विकसित हो सकते हैं जो साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाएंगे और मौजूदा सुरक्षा प्रणालियों को चुनौती दे सकते हैं।
संयुक्त बयान में कहा गया है कि तथाकथित “फ्रंटियर AI मॉडल” बेहद तेजी से साइबर हमलों की क्षमता को बढ़ा सकते हैं। ये तकनीकें न केवल रक्षा प्रणाली को मजबूत करेंगी, बल्कि हैकिंग और डिजिटल हमलों को भी अधिक जटिल, तेज और प्रभावी बना देंगी।
एजेंसियों ने स्पष्ट कहा कि इस बदलाव की समय-सीमा “सालों में नहीं, बल्कि महीनों में” हो सकती है। यानी बहुत जल्द ही दुनिया को AI आधारित साइबर खतरों की नई पीढ़ी का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक AI सिस्टम ऐसे टूल्स को सक्षम बना रहे हैं जो सॉफ्टवेयर की कमजोरियों को पहचानने, उनका दुरुपयोग करने और बड़े पैमाने पर साइबर हमले करने में सक्षम हैं। इससे सरकारों, कंपनियों और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरा बढ़ सकता है।
Five Eyes ने यह भी चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए, तो भविष्य में AI आधारित हमले बड़े पैमाने पर वित्तीय, रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इस चेतावनी के बाद साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि AI अब केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं रहा, बल्कि यह “दोहरी धार वाली तलवार” बन चुका है—जो सुरक्षा भी बढ़ा सकता है और खतरा भी पैदा कर सकता है।
हाल के दिनों में अमेरिका ने कुछ उन्नत AI मॉडल्स पर विदेशी उपयोग को सीमित करने जैसे कदम भी उठाए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकारें इस तकनीक को लेकर सतर्क हो चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में AI और साइबर सुरक्षा के बीच एक नई “तकनीकी दौड़” देखने को मिलेगी, जिसमें देशों और कंपनियों को तेजी से अपने सुरक्षा ढांचे को अपडेट करना होगा।
इस तरह Five Eyes की यह चेतावनी साफ संकेत देती है कि AI का अगला चरण वैश्विक साइबर सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकता है।





