न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को उस समय झटका लगा, जब भारत और इस्राइल ने पाकिस्तान और बेलारूस की ओर से पेश किए गए पारंपरिक हथियार नियंत्रण संबंधी प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में सोमवार को इस प्रस्ताव को 180 देशों का समर्थन मिला, जबकि भारत और इस्राइल ने इसके विरोध में वोट दिया। किसी भी देश ने मतदान से दूरी नहीं बनाई।
प्रस्ताव का शीर्षक ‘सामान्य और पूर्ण निरस्त्रीकरण : क्षेत्रीय और उपक्षेत्रीय स्तर पर पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण’ था। इसमें क्षेत्रीय स्तर पर हथियारों के नियंत्रण के लिए समझौते तैयार करने और रक्षा क्षमताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की बात कही गई थी।
भारत ने बताई विरोध की वजह
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव अनमोल शेर बेदी ने भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण एक वैश्विक मुद्दा है। इसे केवल क्षेत्रीय और उपक्षेत्रीय दायरे में सीमित करके नहीं देखा जा सकता।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश की सुरक्षा संबंधी चिंताएं उसकी भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि उनका दायरा इससे कहीं व्यापक होता है। ऐसे में किसी क्षेत्र विशेष में रक्षा क्षमताओं का संतुलन बनाए रखने की अवधारणा व्यावहारिक नहीं है।
पहले से तीन बार बन चुकी है सहमति
भारत ने प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण आयोग से नए सिद्धांत तैयार करने के अनुरोध पर भी सवाल उठाए। बेदी ने बताया कि आयोग 1993 में क्षेत्रीय निरस्त्रीकरण, 1999 में पारंपरिक हथियार नियंत्रण और 2017 में विश्वास बहाली के उपायों को लेकर तीन दस्तावेज पहले ही सर्वसम्मति से स्वीकार कर चुका है।
भारत ने प्रस्ताव के उस पैराग्राफ के खिलाफ भी अलग से मतदान किया, जिसमें दक्षिण एशिया में पारंपरिक हथियार नियंत्रण से जुड़े प्रस्तावों का उल्लेख था।
प्रस्ताव को अभी अंतिम मंजूरी नहीं
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। यह संयुक्त राष्ट्र महासभा से अंतिम स्वीकृति मिलने के बराबर नहीं है। इस मतदान के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का रुख एक बार फिर स्पष्ट हुआ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को सीमित क्षेत्रीय नजरिये से नहीं देखा जा सकता।





