वाशिंगटन। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। टेक्सास, कान्सास और साउथ कैरोलिना जैसे राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों से कड़ी टक्कर मिलने के कारण रिपब्लिकन खेमे में चिंता बढ़ गई है। चुनाव के नतीजे अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में सत्ता का संतुलन बदल सकते हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव होना है। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में बहुमत हासिल है। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत प्राप्त करती है, तो ट्रंप प्रशासन के फैसलों की जांच और निगरानी बढ़ सकती है। वहीं सीनेट में बहुमत बदलने से सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों और नियुक्तियों पर भी असर पड़ सकता है।
टेक्सास और कान्सास में कांटे का मुकाबला
टेक्सास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स तालारिको रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। इस राज्य में वर्ष 1988 के बाद से कोई डेमोक्रेट सीनेट चुनाव नहीं जीत पाया है। वहीं कान्सास में रिपब्लिकन सीनेटर रोजर मार्शल के सामने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एडम हैमिल्टन मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं। कान्सास में 1932 के बाद से रिपब्लिकन पार्टी ने सीनेट की कोई सीट नहीं गंवाई है।
साउथ कैरोलिना में ट्रंप ने संभाला मोर्चा
साउथ कैरोलिना में रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्लिन ग्राहम और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एनी एंड्रयूज के बीच मुकाबला बेहद करीबी हो गया है। स्थिति को देखते हुए ट्रंप ने रिपब्लिकन उम्मीदवार के समर्थन में राज्य में चुनावी रैली भी की। इस राज्य को लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।
महंगाई और ईरान युद्ध बने बड़े मुद्दे
चुनाव प्रचार में बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतें और ईरान युद्ध प्रमुख मुद्दे बन गए हैं। इन मुद्दों पर विपक्ष ट्रंप प्रशासन को घेर रहा है। हालिया सर्वेक्षणों में भी मतदाताओं के बीच आर्थिक चिंताओं का असर दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये चुनाव ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के अगले दो वर्षों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।





