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खोजी पत्रकारिता पर रोक नहीं लगाएगा डीपीडीपी कानून, प्रेस की स्वतंत्रता संविधान से सुरक्षित: अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम खोजी पत्रकारिता को सीमित नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित करने का कोई इरादा नहीं है। संविधान पत्रकारिता की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और सरकार इस अधिकार को पूरी तरह सुरक्षित रखने के पक्ष में है।

बुधवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वैष्णव ने मीडिया संस्थानों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने समाचार पत्रों के संपादकों और मीडिया पेशेवरों को खुली चर्चा के लिए आमंत्रित किया। मंत्री ने कहा कि यदि कानून के किसी प्रावधान को लेकर आशंका है, तो मीडिया प्रतिनिधि सरकार के सामने अपने सुझाव रख सकते हैं। सरकार उनकी बात सुनने और आवश्यकता पड़ने पर उचित कदम उठाने के लिए तैयार है।

मीडिया संस्थानों ने जताई चिंता

मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने डीपीडीपी अधिनियम, 2023 और इससे संबंधित नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। एसोसिएशन का कहना है कि कानून में पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट नहीं होने से खोजी खबरों के प्रकाशन में कठिनाइयां आ सकती हैं।

मीडिया संस्थानों ने आशंका जताई है कि व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल के लिए सहमति लेने और उसे हटाने से जुड़े प्रावधान भ्रष्टाचार, सरकारी अधिकारियों के कथित दुराचार और जनहित से जुड़े मामलों की जांच को प्रभावित कर सकते हैं। पत्रकारों के गोपनीय स्रोतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है।

निजता और प्रेस की स्वतंत्रता में संतुलन पर जोर

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि डीपीडीपी कानून निजता के मौलिक अधिकार को ध्यान में रखकर बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में निजता को मौलिक अधिकार माना था, जिसके बाद संसद ने इस विषय पर कानून बनाया।

मंत्री के अनुसार, कानून तैयार करने से पहले एक वर्ष से अधिक समय तक परामर्श किया गया था। इसमें समाचार पत्रों, टेलीविजन चैनलों, मीडिया प्रतिनिधियों और सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग से जुड़े पक्षों ने भाग लिया था।

सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 17 नवंबर को

डीएनपीए की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित है। अब इस मामले में सरकार का पक्ष और अदालत की आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

सरकार ने फिलहाल प्रेस की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने का भरोसा दिया है। वहीं, मीडिया संस्थान चाहते हैं कि जनहित में की जाने वाली खोजी पत्रकारिता के लिए कानून में स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान हों।

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