लाल किला विस्फोट का किया जिक्र, IPS अधिकारियों को नशीले पदार्थों और साइबर अपराध जैसी चुनौतियों के प्रति किया आगाह
हैदराबाद। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने कहा है कि देश में आतंकवाद का खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने दिल्ली के लाल किले के पास हाल में हुए विस्फोट का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के भीतर पैदा होने वाले और विदेशों से प्रेरित आतंकवाद की चुनौती अब भी बनी हुई है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस अधिकारियों को सतर्क रहने की जरूरत है।
गोविंद मोहन सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 2025 बैच के 78वें नियमित भर्ती समूह के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बदल रही हैं और उन्हें इनसे निपटने के लिए तैयार रहना होगा।
नक्सलवाद और पूर्वोत्तर में हिंसा में कमी
गृह सचिव ने कहा कि पिछले पांच दशकों में भारत ने वामपंथी उग्रवाद, पूर्वोत्तर में विद्रोह और आतंकवाद जैसी चुनौतियों का सामना किया है। हालांकि, अब इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। उनके अनुसार, हिंसक नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और पूर्वोत्तर में विद्रोह की घटनाएं काफी सीमित रह गई हैं। क्षेत्र के कुछ हिस्सों में जारी हिंसा का स्वरूप मुख्य रूप से जातीय संघर्ष का है।
पांच प्रमुख चुनौतियों का किया उल्लेख
गोविंद मोहन ने पुलिस अधिकारियों के सामने भविष्य की पांच प्रमुख चुनौतियां रखीं। इनमें नशीले पदार्थों की तस्करी और सेवन, साइबर अपराध, आतंकवाद, अवैध विदेशी नागरिकों से जुड़ी समस्याएं तथा अपराधियों की पहचान और गतिविधियों का पता लगाने में आने वाली कठिनाइयां शामिल हैं।
उन्होंने नशीले पदार्थों की समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि वर्ष 2019 के एक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की लगभग सात प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में नशीले पदार्थों का सेवन करती है।
साइबर अपराध पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक के कारण अपराध करना आसान हुआ है और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग भी ऐसे अपराधों को अंजाम दे सकते हैं। इसके अलावा, अवैध रूप से देश में रहने वाले विदेशी नागरिकों से जुड़ी आपराधिक गतिविधियां और कट्टरपंथ भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती हैं।
तकनीक ने बढ़ाई जांच की मुश्किलें
गृह सचिव ने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से अपराधियों की पहचान करना और उनकी गतिविधियों का पता लगाना कठिन हो रहा है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को आधुनिक तकनीक, बेहतर जांच और प्रभावी समन्वय पर विशेष ध्यान देना होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों में कमी आने के बावजूद नए खतरों से निपटने के लिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को लगातार अपनी क्षमता बढ़ानी होगी।





