वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन समेत पांच देशों को बड़ी राहत देते हुए रूस से तेल और गैस खरीदने पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की योजना पर रोक लगा दी है। ट्रंप ने रूस से जुड़े प्रतिबंधों और टैरिफ संबंधी प्रावधानों को फिलहाल लागू नहीं करने का फैसला किया है। इससे भारत पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की आशंका कम हुई है।
ट्रंप ने शुक्रवार देर रात जारी कार्यकारी आदेश में इस फैसले को अमेरिका के राष्ट्रीय हित में बताया। यह कदम उस कानून के तहत प्रस्तावित कार्रवाई से जुड़ा है, जिस पर उन्होंने पिछले महीने हस्ताक्षर किए थे। इस कानून का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उसके ऊर्जा कारोबार से होने वाली आय को सीमित करना था।
क्या था कानून में प्रावधान?
लिंडसे ग्राहम के नाम से जुड़े इस कानून के तहत रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने का प्रावधान था। इसके तहत अमेरिका को संबंधित देशों के आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता था। कुछ परिस्थितियों में शुल्क इससे भी अधिक हो सकता था।
भारत और चीन रूस से कच्चे तेल के प्रमुख खरीदार हैं। ऐसे में इस कानून के लागू होने पर दोनों देशों के अमेरिका के साथ व्यापार पर असर पड़ने की आशंका थी।
भारत समेत पांच देशों को राहत
इस फैसले से भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह छूट भविष्य में भी जारी रहेगी या नहीं, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी प्रशासन आगे परिस्थितियों की समीक्षा कर प्रतिबंधों और टैरिफ संबंधी कदमों पर दोबारा विचार कर सकता है।
रूस-अमेरिका संबंधों पर भी नजर
ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी दोनों देशों पर युद्ध रोकने के लिए दबाव बनाने की बात कह चुके हैं।
भारत के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि रूस से ऊर्जा आयात पर अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क लगाने से भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती थी। फिलहाल टैरिफ संबंधी प्रस्ताव पर रोक से व्यापारिक मोर्चे पर राहत मिली है, लेकिन आगे की नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।





