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SIR पर पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने उठाए सवाल, बोले- सिर्फ शक के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए नाम

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद तेज हो गया है। पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों के नाम मतदाता सूची से केवल इस संदेह के आधार पर हटाए गए कि वे भारतीय नागरिक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई ठोस सबूतों के बिना नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने SIR की प्रक्रिया और चुनाव अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। 

ERO की भूमिका को लेकर उठाए सवाल

कोलकाता में SIR को लेकर आयोजित एक नागरिक सम्मेलन को ऑनलाइन संबोधित करते हुए लवासा ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) की अहम भूमिका होती है। उनके अनुसार, मतदाता का नाम हटाने के लिए अधिकृत अधिकारी को उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

लवासा ने आरोप लगाया कि ERO को चुनाव आयोग के केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम तक पर्याप्त पहुंच नहीं दी गई। उन्होंने इसे कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से अनुचित बताया। उनका कहना था कि मतदाता सूची तैयार करने का उद्देश्य योग्य मतदाताओं को शामिल करना होना चाहिए, न कि उन्हें अनावश्यक परेशानी में डालना।

पहले कभी मतदाता इतने चिंतित नहीं हुए

पूर्व चुनाव आयुक्त ने कहा कि मतदाता सूची में संशोधन पहले भी होते रहे हैं, लेकिन इस बार बड़ी संख्या में लोग अपने नाम को लेकर चिंतित हैं। उन्हें आशंका है कि कहीं उनका नाम सूची से हट न जाए।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी निष्पक्ष और सटीक मतदाता सूची तैयार करने के साथ समय पर चुनाव कराना भी है। लवासा ने पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले SIR की प्रक्रिया के समय और उसके प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए।

प्रकाश राज ने भी चुनाव आयोग पर साधा निशाना

सम्मेलन में अभिनेता और फिल्म निर्माता प्रकाश राज ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलाव का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल उठाए। हालांकि, उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

SIR को लेकर जारी है विवाद

विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और अपात्र या दोहराए गए नामों की पहचान करना है। चुनाव आयोग ने पहले कहा है कि अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत और दोहराए गए मतदाताओं की प्रविष्टियों की जांच की गई है। आयोग के अनुसार, पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और नागरिक संगठनों की ओर से पारदर्शिता तथा निष्पक्षता के सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाए रखना इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य है।

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