बेंगलुरु। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को कथित स्टिंग ऑपरेशन वीडियो विवाद में अदालत से राहत मिली है। बेंगलुरु की एक अदालत ने मंगलवार को उनके खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए विवादित वीडियो के प्रसारण, प्रकाशन और सोशल मीडिया पर साझा करने पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत का यह आदेश वीडियो से जुड़े मानहानि के आरोपों के बीच आया है।
19वें अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायाधीश बी. पुष्पांजलि ने एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करते हुए संबंधित पक्षों को वीडियो को प्रसारित करने, अपलोड करने, प्रकाशित करने या किसी भी डिजिटल माध्यम से साझा करने से रोक दिया। यह रोक मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही तक लागू रहेगी।
सिद्धारमैया ने बताया राजनीतिक साजिश
सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर वीडियो के जरिए उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने वीडियो से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया और इसे उनकी राजनीतिक छवि तथा प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश बताया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पुलिस आयुक्त के पास शिकायत भी दर्ज कराई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अदालत में दलील दी कि वीडियो की प्रामाणिकता और उसकी सामग्री की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना उसका प्रसार उनकी प्रतिष्ठा और सार्वजनिक जीवन को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने वीडियो के प्रसारण और प्रसार पर रोक लगाने की मांग की थी।
बेटे यतींद्र ने भी उठाए सवाल
कर्नाटक सरकार में मंत्री और सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया ने भी विवादित वीडियो को फर्जी बताते हुए इसे अपने पिता की छवि खराब करने की साजिश करार दिया। उन्होंने वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
स्टिंग ऑपरेशन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज
इस मामले ने कर्नाटक की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के प्रदेश अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी ने कथित स्टिंग ऑपरेशन की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में कर्नाटक के कई नेताओं को निशाना बनाया गया है।
वहीं, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि वह किसी भी जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने को तैयार हैं।
फिलहाल अदालत ने विवादित वीडियो के प्रसार पर अंतरिम रोक लगाई है। मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता और वीडियो की प्रामाणिकता पर अंतिम निष्कर्ष आना अभी बाकी है।





