नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाताओं के नाम कथित तौर पर मनमाने ढंग से हटाए जाने के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका दायर की है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एसआईआर से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज, अधिकारियों की आपत्तियां, बैठकों का विवरण और डिजिटल एक्सेस लॉग अदालत में पेश कराने की मांग की है।
चुनाव आयोग के फैसलों की जांच की मांग
याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयोग के उन सभी फैसलों से संबंधित पूरी फाइलें, एजेंडा, बैठक की कार्यवाही, फाइल नोटिंग और चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां उपलब्ध कराई जाएं, जिनका संबंध एसआईआर प्रक्रिया से है। इसके साथ ही ईसीआईनेट (ECINET) और ईआरओनेट (ERONET) के संबंधित डिजिटल एक्सेस लॉग तथा 24 जून 2025 को देशभर में एसआईआर शुरू करने के फैसले से जुड़ी पूरी फाइल भी मांगी गई है।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाने की प्रक्रिया पर्याप्त पारदर्शिता, उचित सूचना और सुनवाई के बिना संचालित की जा रही है। इससे पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
स्वतंत्र जांच पैनल बनाने का प्रस्ताव
इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट से एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया है। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपने और इसमें तकनीकी विशेषज्ञों तथा प्रतिष्ठित व्यक्तियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। समिति मतदाता सूची के डेटाबेस की विश्वसनीयता और एसआईआर लागू करने की प्रक्रिया की जांच करेगी।
याचिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल, संचालन, तकनीकी संरचना और संबंधित प्रक्रियाओं की भी समीक्षा कराने की मांग की गई है।
हटाए गए मतदाताओं का बूथवार विवरण मांगा
विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग से एसआईआर के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बूथवार सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही प्रत्येक नाम हटाने का कारण और उम्र तथा लिंग के आधार पर आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा गया है। पात्र पाए जाने वाले मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग भी की गई है।
याचिका में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कथित अनधिकृत बदलावों पर भी आपत्ति जताई गई है। विपक्ष का कहना है कि इससे पहली बार मतदान करने वाले पात्र नागरिकों को परेशानी हो सकती है।
लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का तर्क
याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करना और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता तथा सामूहिक कार्यप्रणाली बनाए रखना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में कुछ तकनीकी कमियां भी बताई हैं, जिन्हें दूर करने की बात याचिकाकर्ताओं के वकील ने कही है।





