नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए इंडिया गठबंधन के मार्च में शामिल होने वाले नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि देश के लोगों को डराया और धमकाया नहीं जा सकता। संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए विपक्ष का संघर्ष जारी रहेगा।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि सरकार को यह दिखाना जरूरी था कि भारत के लोग डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, “आप हमें हरा नहीं सकते, धमका नहीं सकते और डरा नहीं सकते। हम दबंगई बर्दाश्त नहीं करेंगे।” उन्होंने प्रदर्शन में शामिल विपक्षी दलों के नेताओं, कांग्रेस और गठबंधन के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ नागरिक संगठनों का भी धन्यवाद किया।
आरएसएस पर लगाए आरोप
राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि हाल के दिनों में प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की घटनाएं हुईं। उन्होंने सवाल उठाया कि विरोध के दौरान उन लोगों का सामना करने के लिए आरएसएस के सदस्य सामने क्यों नहीं आए। राहुल ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर भी दबंगई करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ होने वाली गतिविधियों का विरोध करता रहेगा और अपने कदम पीछे नहीं खींचेगा।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण का विरोध
राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने सोमवार को कथित चुनावी अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।
मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार तथा चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की।
‘यह अलग-अलग नहीं, एक ही आंदोलन है’
राहुल गांधी ने कहा कि यह अलग-अलग या समानांतर विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक साझा आंदोलन है। उन्होंने कहा कि सभी लोग संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े हैं।
उन्होंने प्रदर्शन में भाग लेने वाले नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आभार जताते हुए कहा कि भारत के विचार, संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।





