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धराली आपदा के 14 महीने बाद जागी उम्मीद, मलबे में दबे कल्प केदार मंदिर की खुदाई शुरू

उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली में पिछले वर्ष आई विनाशकारी आपदा के बाद मलबे में दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर को बाहर निकालने की कवायद शुरू हो गई है। करीब 14 महीने बाद ग्रामीणों ने मंदिर के जीर्णोद्धार और पुनः दर्शन की उम्मीद के साथ खुदाई का काम शुरू कराया है। शारदीय नवरात्र के पहले दिन विधिविधान से पूजा-अर्चना और हवन के बाद यह कार्य शुरू किया गया। 

सोमेश्वर देवता की डोली की मौजूदगी में शुरू हुई खुदाई

रविवार को धराली गांव में मंदिर समिति और ग्रामीणों ने क्षेत्र के आराध्य सोमेश्वर देवता की डोली के सानिध्य में भूमि पूजन किया। इसके बाद मलबे में दबे मंदिर को खोजने के लिए खुदाई शुरू की गई। ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से यह पहल की है। खुदाई के लिए एक्सकेवेटर मशीन की मदद ली जा रही है।

कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा कर चुके हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि मंदिर को मलबे से बाहर निकालकर उसके संरक्षण और पुनर्निर्माण का रास्ता साफ होगा।

करीब 25 फीट मलबे में दबा है मंदिर

पिछले वर्ष पांच अगस्त को खीरगंगा नदी में आई भीषण बाढ़ और मलबे ने धराली में भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा में प्राचीन कल्प केदार मंदिर का ऊपरी गुंबद क्षतिग्रस्त हो गया था, जबकि गर्भगृह और मंदिर परिसर मलबे में दब गए थे। मंदिर के करीब 25 फीट नीचे दबे होने का अनुमान है।

ग्रामीणों के अनुसार, कल्प केदार मंदिर धराली की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान रहा है। यहां दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते थे। मंदिर से स्थानीय लोगों की आस्था के साथ-साथ आजीविका भी जुड़ी हुई थी।

सौ साल बाद फिर शुरू हुई खुदाई

मंदिर समिति से जुड़े लोगों के मुताबिक, कल्प केदार मंदिर को खोजने के लिए इतिहास में पहले भी कई बार खुदाई की गई है। वर्ष 1803 की आपदा में मंदिर क्षेत्र को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद वर्ष 1887 में यहां तीन मंदिर दिखाई देने का उल्लेख मिलता है। वर्ष 1926 में आई आपदा के दौरान मुख्य मंदिर का हिस्सा फिर मलबे में दब गया था, जिसे ग्रामीणों ने खुदाई कर बाहर निकाला था।

अब करीब एक सदी बाद मंदिर को बचाने के लिए फिर खुदाई शुरू की गई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस प्रयास से प्राचीन धरोहर को सुरक्षित निकालकर उसका जीर्णोद्धार किया जा सकेगा।

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