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रामनगर में पहली बार कोसी नदी की महाआरती, सीएम धामी बोले- नदियां सभ्यता और संस्कृति की जीवनरेखा

रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड के रामनगर में रविवार को गिरिजा देवी मंदिर के निकट कोसी नदी के तट पर पहली बार भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। गंगा आरती की तर्ज पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही नदी संरक्षण और स्वच्छता का संदेश देना रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए इसे प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने वाला प्रयास बताया। 

नदियां केवल जलधारा नहीं, जीवन का आधार

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पहचान उसकी आस्था, आध्यात्मिक परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। नदियां केवल जल की धारा नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और जनजीवन की जीवनरेखा हैं। उन्होंने कहा कि मां कोसी का क्षेत्र के लोगों के जीवन में विशेष महत्व है और मां गिरिजा देवी के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था धार्मिक परंपराओं को समृद्ध करती है।

उन्होंने कहा कि कोसी नदी के पावन तट पर आयोजित महाआरती श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक होने के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण तथा नदियों की स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी देती है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए नदियों को बचाने का संकल्प

मुख्यमंत्री ने लोगों से नदियों की पवित्रता बनाए रखने और प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने, सामाजिक सद्भाव बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने उम्मीद जताई कि कोसी नदी के तट से प्रेम, सद्भाव, स्वच्छता और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश पूरे प्रदेश में पहुंचेगा।

फूलों और रोशनी से सजाया गया नदी तट

रविवार शाम करीब साढ़े छह बजे आयोजित महाआरती के लिए गिरिजा देवी मंदिर के निकट कोसी नदी के तट को फूलों की मालाओं और बिजली की झालरों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था। आयोजन को लेकर रामनगर में प्रचार-प्रसार भी किया गया।

कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट, मंदिर के प्रधान पुजारी मनोज चंद्र पांडे और अन्य जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे। आयोजकों को उम्मीद है कि इस पहल से रामनगर में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी और कोसी नदी के संरक्षण के प्रति लोगों की भागीदारी बढ़ेगी।

 

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