नई दिल्ली। देश के विभिन्न राज्यों में 26 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 के बीच 100 से अधिक लोगों की भागीदारी वाले कुल 60 प्रदर्शन दर्ज किए गए। इन प्रदर्शनों में चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद, महिलाओं की सुरक्षा और विश्वविद्यालयों से संबंधित मुद्दे प्रमुख रहे। एसीएलईडी के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए।
28 सितंबर को सबसे ज्यादा प्रदर्शन
आंकड़ों के मुताबिक, 28 सितंबर को एक ही दिन में 20 प्रदर्शन दर्ज किए गए। वहीं, 2 से 4 अक्टूबर के बीच कुल 26 प्रदर्शन हुए। इन घटनाओं से देश में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर जारी विरोध की स्थिति सामने आई।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन
इस अवधि में चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को लेकर कई रैलियां और प्रदर्शन हुए। कांग्रेस, उससे जुड़े छात्र संगठनों और अन्य समूहों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।
प्रदर्शनों के आंकड़ों में कांग्रेस और उसके छात्र संगठनों के 36 प्रदर्शन दर्ज किए गए। अन्य छात्र समूहों ने 12 और वामपंथी दलों व उनसे जुड़े छात्र संगठनों ने 11 प्रदर्शनों में भाग लिया। आम आदमी पार्टी (AAP), कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और क्षेत्रीय दल भी कुछ प्रदर्शनों में शामिल रहे।
महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा
चुनावी विवाद के अलावा महिलाओं की सुरक्षा और यौन हिंसा से जुड़े मामलों को लेकर भी विरोध प्रदर्शन हुए। पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म की घटना के बाद छात्रों ने प्रदर्शन किया।
दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज के छात्रों ने भी 17 वर्षीय लड़की के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की मांग उठाई।
कई राज्यों में हुए प्रदर्शन
प्रदर्शन पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, असम और त्रिपुरा समेत कई राज्यों में दर्ज किए गए। इनमें से अधिकतर बड़े प्रदर्शन शहरी क्षेत्रों और विश्वविद्यालयों के आसपास केंद्रित रहे।
इस बीच, CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया। इससे राजधानी में सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर भी गतिविधियां बढ़ीं।





