नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम और प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से मुलाकात की। इस दौरान भारत और सिंगापुर के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, निवेश के नए अवसर तलाशने और द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
सीतारमण 9 से 11 अक्टूबर तक तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सिंगापुर में हैं। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति देना है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकट पर चर्चा
वित्त मंत्री ने सिंगापुर के राष्ट्रपति से उनके आधिकारिक आवास ‘द इस्ताना’ में मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ।
सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने भी मुलाकात के बाद कहा कि दोनों नेताओं के बीच वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और मौजूदा ऊर्जा संकट से निपटने के उपायों पर चर्चा हुई। सीतारमण ने उन्हें भारत के आर्थिक घटनाक्रम और निवेश व सहयोग के नए अवसरों की जानकारी भी दी।
भारत में निवेश का बड़ा स्रोत है सिंगापुर
सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का सबसे बड़ा स्रोत है। अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच सिंगापुर से भारत में करीब 194.68 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया। सिंगापुर के संस्थागत निवेशक जीआईसी और टेमासेक भी भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं।
व्यापार और तकनीक में सहयोग की संभावनाएं
सीतारमण ने सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन से भी मुलाकात की। इस दौरान भारत की विकास संभावनाओं और सिंगापुर की कंपनियों के लिए उपलब्ध निवेश अवसरों पर चर्चा हुई।
भारत और सिंगापुर के बीच व्यापार, डिजिटल वित्तीय सेवाओं, पूंजी बाजार, कराधान, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, कौशल विकास और विमानन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
वित्त मंत्री की इस यात्रा से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने तथा निवेश के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।





