मुंबई। मुंबई में लगातार सामने आ रही कचरे और गंदगी की समस्या को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल साउथ मुंबई, वर्ली या नरीमन प्वाइंट जैसे पॉश इलाकों की सफाई से पूरे मुंबई शहर को साफ नहीं माना जा सकता।
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने कहा कि शहर के कई हिस्सों में सड़कों और खुले स्थानों पर कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं। अदालत ने विशेष रूप से पश्चिमी उपनगरों के जोगेश्वरी और मलाड इलाकों में खराब सफाई व्यवस्था का उल्लेख किया। जोगेश्वरी में एक नगरपालिका स्कूल के पास प्लास्टिक कचरे के ढेर का भी अदालत ने संज्ञान लिया।
अदालत ने कहा कि पिछले कई वर्षों में सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए कई निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीन पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा। पीठ ने कहा कि नागरिकों के जीवन, स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। हर वार्ड में बुनियादी स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना नगर निगम की जिम्मेदारी है।
यह मामला कांजुरमार्ग में नगरपालिका के ठोस कचरे के लगातार डंप किए जाने को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत ने BMC से सभी 24 वार्डों में सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति और उसे सुधारने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।
हाई कोर्ट ने BMC से गांधी जयंती के अवसर पर चलाए गए स्वच्छता अभियान के तहत किए गए कार्यों का भी विस्तृत ब्योरा मांगा है। इसके लिए नगर निगम को व्यापक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वार्ड अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में बुलाकर स्थिति की जानकारी ली जा सकती है।
BMC ने अदालत को बताया कि अवैध कचरा फेंकने वाले स्थानों की पहचान की गई है और वहां CCTV कैमरे लगाए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना लगाने और जागरूकता अभियान चलाने की कार्रवाई भी की जा रही है। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी।





