देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने सरकारी निर्माण योजनाओं से जुड़ी लंबी कागजी प्रक्रिया को कम करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सिस्टम (ई-पीएमएस) लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत योजना तैयार करने से लेकर डीपीआर, तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति, शासनादेश, टेंडर और भुगतान तक की प्रक्रिया एक ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाएगी।
नई व्यवस्था से लोक निर्माण विभाग समेत अन्य निर्माण एजेंसियों की परियोजनाओं की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी। अब अधिकारियों को योजना की प्रगति, स्वीकृति और भुगतान से जुड़ी जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी।
डीपीआर से स्वीकृति तक ऑनलाइन प्रक्रिया
किसी भी निर्माण योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने के बाद उसे कई विभागीय और प्रशासनिक स्तरों से होकर गुजरना पड़ता है। पुरानी व्यवस्था में इस प्रक्रिया में कागजी फाइलों के कारण काफी समय लग सकता था।
ई-पीएमएस के माध्यम से अब ई-डीपीआर तैयार की जाएगी और उच्च अधिकारियों की स्वीकृति भी इसी डिजिटल प्रणाली के जरिए होगी। तकनीकी जांच, वित्तीय मूल्यांकन और शासनादेश जारी करने की प्रक्रिया भी पोर्टल से जोड़ी गई है।
हर स्तर पर होगी निगरानी
पोर्टल पर योजना में किए गए संशोधन, स्वीकृति की स्थिति, कार्य की प्रगति और भुगतान संबंधी जानकारी दर्ज रहेगी। इससे शासन स्तर के अधिकारी यह देख सकेंगे कि कोई योजना किस चरण में है और किस स्तर पर उसकी प्रक्रिया चल रही है।
सरकार का मानना है कि एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से फाइलों की आवाजाही कम होगी और योजनाओं की स्वीकृति में लगने वाला समय घटेगा। साथ ही अधिकारियों की जिम्मेदारी और कामकाज की निगरानी भी अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
ई-ऑफिस से भी जोड़ा गया पोर्टल
ई-पीएमएस पोर्टल को ई-ऑफिस व्यवस्था से भी जोड़ा गया है। लोक निर्माण विभाग में इस प्रणाली का परीक्षण किया जा चुका है। सफल परीक्षण के बाद अब इसे राज्य में लागू किया गया है।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के अनुसार, नई व्यवस्था से निर्माण कार्यों में तेजी आएगी और सरकारी परियोजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।





