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कोलकाता की शर्मिला मोना सिन्हा अमेरिकी नेशनल विमेंस हॉल ऑफ फेम में शामिल, इंदिरा नूयी के बाद दूसरी भारतीय मूल की महिला

वाशिंगटन। कोलकाता में जन्मी शर्मिला मोना सिन्हा ने अमेरिका में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्हें न्यूयॉर्क के सेनिका फॉल्स स्थित प्रतिष्ठित नेशनल विमेंस हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है। इस सम्मान के साथ वह इंदिरा नूयी के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी भारतीय मूल की महिला बन गई हैं।

शर्मिला का जीवन महिलाओं के अधिकारों और समानता की लड़ाई से जुड़ा रहा है। बचपन में उन्होंने लैंगिक भेदभाव का अनुभव किया। कोलकाता में मदर टेरेसा के अनाथालय में स्वयंसेवक के रूप में काम करने के दौरान भी उन्होंने महसूस किया कि लड़के और लड़कियों के साथ समाज का व्यवहार अलग-अलग होता है। इन अनुभवों ने उनके विचारों और भविष्य के काम पर गहरा प्रभाव डाला।

18 वर्ष की उम्र में शर्मिला उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चली गईं। उन्होंने स्मिथ कॉलेज से अर्थशास्त्र और कला इतिहास की पढ़ाई की और बाद में कोलंबिया बिजनेस स्कूल से एमबीए किया। इसके बाद उन्होंने मॉर्गन स्टेनली में निवेश बैंकर के रूप में करियर शुरू किया और प्रॉक्टर एंड गैंबल, यूनिलीवर तथा एलिजाबेथ आर्डेन जैसी कंपनियों में भी काम किया।

बाद में उन्होंने अपने कारोबारी अनुभव और प्रबंधन कौशल को सामाजिक बदलाव के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया। वह Women Moving Millions से जुड़ीं, जिसके सदस्यों ने महिलाओं और लड़कियों के लिए काम करने वाले संगठनों को करीब एक अरब डॉलर की राशि देने की प्रतिबद्धता जताई।

शर्मिला 2022 से अंतरराष्ट्रीय संगठन Equality Now की सीईओ हैं। यह संस्था महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण कानूनों को खत्म करने तथा बाल विवाह, यौन हिंसा और महिलाओं के आर्थिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर काम करती है।

सम्मान ग्रहण करते हुए शर्मिला ने अपनी मां की उस सीख को याद किया, जिसमें वह हर सुबह जरूरतमंद व्यक्ति के लिए एक मुट्ठी चावल अलग रखती थीं। उन्होंने इस सम्मान को अपनी जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि इसे आगे दूसरों तक पहुंचाना चाहिए।

शर्मिला मोना सिन्हा का यह सम्मान भारतीय मूल की महिलाओं की वैश्विक स्तर पर बढ़ती पहचान और महिलाओं के अधिकारों के लिए उनके योगदान को रेखांकित करता है।

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