नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके निर्णय लेने के तरीके को चुनौती देने वाली याचिका को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बहुसदस्यीय चुनाव आयोग के सामूहिक अधिकारों का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं किया जा रहा है।
मामला मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष रखा गया। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग की। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि कानून के तहत बहुसदस्यीय आयोग के फैसले सर्वसम्मति से या मतभेद की स्थिति में बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए। इस पर पीठ ने याचिका को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
CEC के अधिकारों पर भी सवाल
याचिका बिहार निवासी राकेश कुमार सिंह ने दायर की है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को चुनौती देते हुए सवाल उठाया गया है कि क्या चुनाव आयोग को सामूहिक रूप से प्राप्त संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त कर सकते हैं। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के कानून का हवाला दिया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि आयोग के मौजूदा ढांचे में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ अन्य चुनाव आयुक्त भी शामिल हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया सामूहिक होनी चाहिए। याचिकाकर्ता ने अदालत से इस संबंध में संवैधानिक और कानूनी स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है।
SIR को लेकर भी विवाद
मामला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विवाद के बीच सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि उसके निर्णय कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप लिए गए हैं और आयोग के भीतर अलग-अलग राय संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने का अर्थ अभी आरोपों पर कोई न्यायिक निष्कर्ष निकलना नहीं है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत याचिका में उठाए गए कानूनी सवालों पर विचार करेगी।





