न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को कई यूरोपीय देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में वैश्विक घटनाक्रम, आर्थिक सहयोग और भारत के यूरोपीय देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने के मुद्दों पर चर्चा हुई।
जयशंकर ने नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री टाम बेरेनडसेन के साथ मुलाकात में यूक्रेन संघर्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मई में हुई नीदरलैंड्स यात्रा से जुड़े विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।
विदेश मंत्री ने स्लोवेनिया और फिनलैंड के अपने समकक्षों से भी अलग-अलग मुलाकात की। जयशंकर ने कहा कि भारत के इन देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध और यूरोपीय संघ के साथ सहयोग लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार एवं आर्थिक संबंधों को लेकर भी इन चर्चाओं का महत्व है। भारत और यूरोपीय संघ ने इस वर्ष मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर औपचारिक घोषणा की थी। आर्थिक संबंधों के साथ तकनीक, निवेश और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी दोनों पक्षों की बातचीत जारी है।
प्रशांत और कैरेबियाई देशों से भी बातचीत
जयशंकर ने यूरोपीय देशों के अलावा प्रशांत क्षेत्र और कैरेबियाई देशों के विदेश मंत्रियों से भी अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक सहयोग और विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ बातचीत में जलवायु परिवर्तन, डिजिटल कनेक्टिविटी, नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष सहयोग और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर जोर रहा। वहीं कैरेबियाई देशों के साथ स्वास्थ्य, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल सहयोग और विकास साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
जयशंकर की ये बैठकें संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान भारत की व्यापक कूटनीतिक सक्रियता का हिस्सा हैं। विदेश मंत्री 26 सितंबर को महासभा की सामान्य बहस को संबोधित करने वाले हैं।





