नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने फायर इंश्योरेंस क्लेम से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि बीमाधारक की ओर से गलत घोषणाएं, रिकॉर्ड में हेरफेर और पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर बीमा कंपनी द्वारा क्लेम को पूरी तरह खारिज करना उचित हो सकता है। यह फैसला 21 सितंबर 2026 को सुनाया गया।
मामला हेमकुंड डुप्लेक्स एंड बोर्ड प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी ने अपने कारखाने और स्टॉक का न्यू इंडिया एश्योरेंस से बीमा कराया था। 7 मई 2009 को फैक्ट्री के वेस्ट पेपर यार्ड में आग लग गई। इसके बाद कंपनी ने करीब 7.31 करोड़ रुपये के बीमा क्लेम का दावा किया।
बीमा कंपनी ने मामले की जांच के लिए सर्वेयर और जांच एजेंसियों की मदद ली। रिपोर्टों में स्टॉक से जुड़े रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां और कथित गलत घोषणाएं सामने आईं। जांच में आग की परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए गए। इन आधारों पर कंपनी ने बीमा क्लेम को खारिज कर दिया था।
इसके बाद मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) पहुंचा। NCDRC ने बीमा कंपनी के फैसले को स्वीकार नहीं किया और कंपनी के पक्ष में आदेश दिया था। इसके खिलाफ न्यू इंडिया एश्योरेंस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सर्वेयर की रिपोर्टों और मामले से जुड़े रिकॉर्ड पर विचार करते हुए कहा कि बीमाधारक द्वारा गलत घोषणाएं करना और पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन करना गंभीर मामला है। अदालत ने NCDRC के 19 नवंबर 2024 के आदेश को रद्द कर दिया और न्यू इंडिया एश्योरेंस की अपील स्वीकार कर ली।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि बीमा कंपनी द्वारा जमा की गई 50 लाख रुपये की राशि ब्याज सहित वापस की जाए। मामले में दोनों पक्षों को अपने-अपने खर्च वहन करने का निर्देश दिया गया है।




