मास्को। यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों के बीच रूस ने अमेरिका के नए प्रतिबंध कानून को लेकर चेतावनी दी है। क्रेमलिन का कहना है कि रूस पर अतिरिक्त अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जाने से यूक्रेन में शांति समझौते की कोशिशें और मुश्किल हो सकती हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से व्यापक प्रतिबंध विधेयक पारित किया है। इसमें रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों के साथ-साथ मौजूदा प्रतिबंधों से बचने वाले टैंकरों के नेटवर्क पर कार्रवाई का प्रावधान है। विधेयक में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार भी अमेरिकी राष्ट्रपति को दिया गया है।
क्रेमलिन ने बताया ‘अमित्रतापूर्ण कदम’
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि अमेरिका की ओर से लगाए जाने वाले अतिरिक्त प्रतिबंध शांति समझौते की दिशा में जारी प्रयासों को जटिल बनाएंगे। उन्होंने अमेरिकी कदम को रूस के प्रति ‘अमित्रतापूर्ण कार्रवाई’ बताया और कहा कि मॉस्को इस कानून की प्रगति पर नजर रख रहा है।
रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ेगा दबाव
नए कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा और रक्षा से होने वाली आय पर दबाव बढ़ाना है। इसके तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर भी अमेरिकी कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है। इससे रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदार देशों के साथ उसके व्यापारिक संबंध प्रभावित होने की आशंका है।
शांति वार्ता पहले से धीमी
रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता लंबे समय से ठप पड़ी है। अमेरिका की ओर से दोनों पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में रूस का कहना है कि नए प्रतिबंध कूटनीतिक प्रक्रिया को और कठिन बना सकते हैं। दूसरी ओर, प्रतिबंध समर्थकों का तर्क है कि रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर उसे युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत की दिशा में लाया जा सकता है।
इस घटनाक्रम से रूस-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ यूक्रेन में चल रहे शांति प्रयासों पर भी दबाव बढ़ने के संकेत हैं। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक समाधान की कोशिशें जारी हैं।




