नई दिल्ली। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में अब सहयोगी दलों के अलग-अलग रुख सामने आने लगे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू कर दिया जाएगा। इसके बाद भाजपा के कुछ प्रमुख सहयोगी दलों ने इस मुद्दे पर सावधानी बरतने के संकेत दिए हैं।
आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के संसदीय दल के नेता लवू श्री कृष्ण देवरायालु ने कहा कि UCC को लेकर अभी पार्टी के स्तर पर कोई विस्तृत चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी कदम से पहले संबंधित पक्षों और समाज के विभिन्न वर्गों से विचार-विमर्श जरूरी होगा।
बिहार में भाजपा की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने भी व्यापक चर्चा की जरूरत बताई है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वह UCC के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर चर्चा करेंगे। जदयू का कहना है कि ऐसे संवेदनशील विषय पर सभी समुदायों को साथ लेकर सहमति बनाने की जरूरत है।
वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी स्पष्ट रुख अपनाने से पहले UCC का मसौदा सार्वजनिक करने और व्यापक विचार-विमर्श की मांग की है। उन्होंने देश की सामाजिक विविधता और संविधान में विभिन्न समुदायों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए मौजूद विशेष प्रावधानों का हवाला दिया।
दूसरी ओर, भाजपा UCC को अपने प्रमुख नीतिगत एजेंडे में शामिल करती रही है। उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है, जबकि कुछ अन्य राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 से पहले NDA शासित सभी 21 राज्यों में इसे लागू करने का भरोसा जताया है।
ऐसे में भाजपा के सामने अपने सहयोगी दलों को साथ लेकर UCC पर सहमति बनाने की चुनौती होगी। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर NDA के भीतर होने वाली बैठकों और राज्यों की भूमिका पर सबकी नजर रहेगी।





