नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को तीन दिवसीय भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। वह 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं की बैठक में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक व्यापार में बदलाव के बीच भारत और रूस अपने पारंपरिक संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है। भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। भारतीय उत्पादों की रूसी बाजार तक पहुंच बढ़ाना और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ संभावित मुक्त व्यापार समझौते पर भी चर्चा महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हो सकती है।
ऊर्जा क्षेत्र भी वार्ता का प्रमुख विषय रहेगा। तेल और गैस के अलावा परमाणु ऊर्जा, विशेषकर रूस की तकनीक से जुड़े परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्टों में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत हो सकती है। दोनों देश ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग करते रहे हैं।
रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों नेताओं की बातचीत अहम मानी जा रही है। रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, संयुक्त उत्पादन और नई तकनीकों में सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा की संभावना है। इसके अलावा अंतरिक्ष, फार्मास्यूटिकल्स, तकनीक और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी विचार हो सकता है।
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में रूस, चीन, ईरान समेत कई सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे। ऐसे में मोदी-पुतिन वार्ता को ब्रिक्स बैठक से पहले भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





