मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने वर्ष 2019 में मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति एन.आर. बोरकर की एकल पीठ ने कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश में ऐसी कोई स्पष्ट कानूनी खामी या गंभीर त्रुटि नहीं मिली, जिसके आधार पर हस्तक्षेप किया जाए।
2018 की टिप्पणी से जुड़ा है मामला
यह मामला वर्ष 2018 में राजस्थान में एक सार्वजनिक सभा के दौरान राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर राहुल गांधी की टिप्पणी से संबंधित है। शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमल ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के लिए ‘कमांडर-इन-थीफ’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और बाद में सोशल मीडिया पर भी इससे संबंधित वीडियो साझा किया। शिकायतकर्ता ने खुद को भाजपा का सदस्य बताते हुए मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायतकर्ता की याचिका को माना सुनवाई योग्य
राहुल गांधी की ओर से दलील दी गई थी कि शिकायतकर्ता सीधे तौर पर कथित मानहानि से प्रभावित व्यक्ति नहीं हैं और इसलिए उन्हें शिकायत दर्ज कराने का अधिकार नहीं था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि भाजपा एक पहचान योग्य राजनीतिक इकाई है और प्रधानमंत्री पार्टी का प्रमुख चेहरा हैं। इसलिए यह प्रारंभिक स्तर पर नहीं कहा जा सकता कि टिप्पणी का प्रभाव पार्टी के सदस्यों तक नहीं पहुंच सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी केवल प्रधानमंत्री तक सीमित थी या उससे भाजपा के अन्य सदस्यों की प्रतिष्ठा भी प्रभावित हुई, इसका फैसला साक्ष्यों और गवाहों की जांच के बाद निचली अदालत में किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए छह सप्ताह की राहत
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करने के बावजूद राहुल गांधी को तत्काल राहत दी है। मजिस्ट्रेट अदालत में मामले की सुनवाई छह सप्ताह तक स्थगित रखने का निर्देश जारी रखा गया है, ताकि राहुल गांधी इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकें।
इस फैसले के बाद राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की कानूनी प्रक्रिया फिलहाल जारी रहेगी।





