नैनीताल। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ मामले में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने सोमवार को जनहित याचिका निस्तारित कर दी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से कराने का आश्वासन दिया गया।
मामला आठ अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई खरगे की जनसभा के बाद का है। आरोप है कि 11 अगस्त को कुछ लोगों ने मैदान में गंगाजल छिड़ककर और हवन कर कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान किया था। घटना को लेकर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे सामाजिक एवं जातिगत भेदभाव से जोड़कर सवाल उठाए थे।
इस प्रकरण को लेकर देहरादून के सामाजिक कार्यकर्ता बैजनाथ ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में घटना से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई थी। इनमें खरगे की जनसभा की वीडियो रिकॉर्डिंग, कार्यक्रम के बाद मैदान में हुई गतिविधियों की फुटेज तथा आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग शामिल थी।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि मामले में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं और प्रकरण की जांच की जा रही है। सरकार के निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
यह विवाद पहले ही राजनीतिक रंग ले चुका है। खरगे ने इसे अपने अपमान से जोड़ते हुए मामला उठाया था, जबकि भाजपा की ओर से कहा गया था कि पार्टी इस तरह की घटना का समर्थन नहीं करती और इसकी जांच कराई जाएगी। अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद पूरे मामले की जांच और उसके निष्कर्ष पर नजर रहेगी।





