नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भारत और जर्मनी के बीच सीमा-पार वाणिज्यिक विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता और पंचाट व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बढ़ते आर्थिक संबंधों के साथ भविष्य में जटिल कारोबारी विवाद भी बढ़ सकते हैं, ऐसे में प्रभावी और भरोसेमंद विवाद समाधान व्यवस्था जरूरी है।
बर्लिन में आयोजित इंडो-जर्मन आर्बिट्रेशन कॉन्क्लेव में बोलते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक सहयोग लगातार विस्तार ले रहा है। आपूर्ति समझौतों, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, तकनीकी समझौतों, संयुक्त उपक्रमों और सीमा-पार निवेश से जुड़े मामलों में विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए मजबूत पंचाट व्यवस्था आवश्यक है।
संस्थागत सहयोग बढ़ाने की जरूरत
CJI ने दोनों देशों की पंचाट संस्थाओं के बीच अधिक सहयोग का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग केवल संस्थाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वकीलों, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और न्यायाधीशों के बीच भी अनुभव और ज्ञान का आदान-प्रदान होना चाहिए। इससे दोनों देशों में विवाद समाधान की बेहतर व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।
उन्होंने भारत में पंचाट व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। इनमें आर्बिट्रेशन एंड कन्सिलिएशन एक्ट में 2015, 2019 और 2021 में किए गए बदलाव शामिल हैं। इन सुधारों का उद्देश्य न्यायिक हस्तक्षेप कम करना, संस्थागत पंचाट को बढ़ावा देना और विवादों के समाधान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
भरोसेमंद व्यवस्था से बढ़ेगा निवेश
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भरोसा बेहद महत्वपूर्ण है। विवादों के समाधान की प्रक्रिया जितनी पूर्वानुमानित, पारदर्शी और प्रभावी होगी, कारोबारी माहौल उतना ही मजबूत होगा। भारत-जर्मनी के बीच दीर्घकालिक पंचाट सहयोग दोनों देशों के व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूती दे सकता है।





